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स्तोत्र ४६:२-३

स्तोत्र ४६:२-३

२
तब हम भयभीत न होंगे, चाहे पृथ्वी विस्थापित हो जाए, चाहे पर्वत महासागर के गर्भ में जा पड़ें,
३
हां, तब भी जब समुद्र गरजना करते हुए फेन उठाने लगें और पर्वत इस उत्तेजना के कारण थर्रा जाएं.
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