स्तोत्र ४५:५-८
५
आपके तीक्ष्ण बाण राजा के शत्रुओं के हृदय बेध दें; राष्ट्र आपसे नाश हो आपके चरणों में गिर पड़ें.
६
परमेश्वर, आपका सिंहासन अमर है; आपके राज्य का राजदंड वही होगा, जो सच्चाई का राजदंड है.
७
धार्मिकता आपको प्रिय है तथा दुष्टता घृणास्पद; यही कारण है कि परमेश्वर, आपके परमेश्वर ने हर्ष के तेल से आपको अभिषिक्त करके आपके समस्त साथियों से ऊंचे स्थान पर बसा दिया है.
८
आपके सभी वस्त्र गन्धरस, अगरू तथा तेजपात से सुगंधित किए गए हैं; हाथी-दांत से जड़ित राजमहल से मधुर तन्तु वाद्यों का संगीत आपको मगन करता रहता है.
Settings