मुख्य सामग्री पर जाएँ
स्तोत्र १६:९-११

पुनरुत्थान की आशा

स्तोत्र १६:९-११
इसलिये मेरा हृदय आनंदित और मेरी जीभ मगन हुई; मेरा शरीर भी सुरक्षा में विश्राम करेगा,
१०
क्योंकि आप मेरे प्राण को अधोलोक में सड़ने नहीं छोड़ देंगे, और न अपने मनचाहे प्रिय पात्र को मृत्यु के क्षय में.
११
आप मुझ पर सर्वदा जीवन का मार्ग प्रकाशित करेंगे; आपकी उपस्थिति में परम आनंद है, आपके दाहिने हाथ में सर्वदा सुख बना रहता है.
Settings

Reading Style

Typeface

Font Size 19px

Reading Width 45 chars

Options