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स्तोत्र १३७:१-२

स्तोत्र १३७:१-२

बाबेल की नदी के तट पर बैठे हुए ज़ियोन का स्मरण कर हम रो रहे थे.
वहां मजनू वृक्षों पर हमने अपने वाद्य टांग दिए थे.
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