Skip to content
स्तोत्र १३७:१-२

स्तोत्र १३७:१-२

बाबेल की नदी के तट पर बैठे हुए ज़ियोन का स्मरण कर हम रो रहे थे.
वहां मजनू वृक्षों पर हमने अपने वाद्य टांग दिए थे.
Settings

Reading style

Typeface

Font size 19px

Reading width 90 chars

Options