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स्तोत्र १३२:१-४

स्तोत्र १३२:१-४

१
आराधना के लिए यात्रियों का गीत. याहवेह, दावीद को और उनके द्वारा झेली गई समस्त विषमताओं को स्मरण कीजिए.
२
उन्होंने याहवेह की शपथ खाई, तथा याकोब के सर्वशक्तिमान से शपथ की थी:
३
“मैं न तो तब तक घर में प्रवेश करूंगा और न मैं अपने बिछौने पर जाऊंगा,
४
न तो मैं अपनी आंखों में नींद आने दूंगा और न पलकों में झपकी,
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