स्तोत्र १३२:१-१०
१
आराधना के लिए यात्रियों का गीत. याहवेह, दावीद को और उनके द्वारा झेली गई समस्त विषमताओं को स्मरण कीजिए.
२
उन्होंने याहवेह की शपथ खाई, तथा याकोब के सर्वशक्तिमान से शपथ की थी:
३
“मैं न तो तब तक घर में प्रवेश करूंगा और न मैं अपने बिछौने पर जाऊंगा,
४
न तो मैं अपनी आंखों में नींद आने दूंगा और न पलकों में झपकी,
५
जब तक मुझे याहवेह के लिए एक स्थान उपलब्ध न हो जाए, याकोब के सर्वशक्तिमान के आवास के लिए.”
६
इसके विषय में हमने एफ़राथा में सुना, याअर के मैदान में भी यही पाया गया:
७
“आओ, हम उनके आवास को चलें; हम उनके चरणों में जाकर आराधना करें.
८
‘याहवेह, अब उठकर अपने विश्राम स्थल पर आ जाइए, आप और आपकी सामर्थ्य का संदूक भी.
९
आपके पुरोहित धर्म के वस्त्र पहिने हुए हों; और आपके सात्विक हर्ष गीत गाएं.’ ”
१०
अपने सेवक दावीद के निमित्त, अपने अभिषिक्त को न ठुकराईए.
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