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स्तोत्र १३२:१-१०

स्तोत्र १३२:१-१०

आराधना के लिए यात्रियों का गीत. याहवेह, दावीद को और उनके द्वारा झेली गई समस्त विषमताओं को स्मरण कीजिए.
उन्होंने याहवेह की शपथ खाई, तथा याकोब के सर्वशक्तिमान से शपथ की थी:
“मैं न तो तब तक घर में प्रवेश करूंगा और न मैं अपने बिछौने पर जाऊंगा,
न तो मैं अपनी आंखों में नींद आने दूंगा और न पलकों में झपकी,
जब तक मुझे याहवेह के लिए एक स्थान उपलब्ध न हो जाए, याकोब के सर्वशक्तिमान के आवास के लिए.”
इसके विषय में हमने एफ़राथा में सुना, याअर के मैदान में भी यही पाया गया:
“आओ, हम उनके आवास को चलें; हम उनके चरणों में जाकर आराधना करें.
‘याहवेह, अब उठकर अपने विश्राम स्थल पर आ जाइए, आप और आपकी सामर्थ्य का संदूक भी.
आपके पुरोहित धर्म के वस्त्र पहिने हुए हों; और आपके सात्विक हर्ष गीत गाएं.’ ”
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अपने सेवक दावीद के निमित्त, अपने अभिषिक्त को न ठुकराईए.
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