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स्तोत्र १२३:३-४

अपमान के बीच दया की प्रार्थना

स्तोत्र १२३:३-४
हम पर कृपा कीजिए, याहवेह, हम पर कृपा कीजिए, हमने बहुत तिरस्कार सहा है.
हमने अहंकारियों द्वारा घोर उपहास भी सहा है, हम अहंकारियों के घोर घृणा के पात्र होकर रह गए हैं.
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