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स्तोत्र ११९:११-१३

स्तोत्र ११९:११-१३

११
आपके वचन को मैंने अपने हृदय में इसलिये रख छोड़ा है, कि मैं आपके विरुद्ध पाप न कर बैठूं.
१२
याहवेह, आपका स्तवन हो; मुझे अपनी विधियों की शिक्षा दीजिए.
१३
जो व्यवस्था आपके मुख द्वारा निकली हैं, मैं उन्हें अपने मुख से दोहराता रहता हूं.
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