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स्तोत्र ११८:२८-२९

अन्तिम मन्नत और स्तुतिगान

स्तोत्र ११८:२८-२९
२८
आप ही मेरे परमेश्वर हैं, मैं आपके प्रति आभार व्यक्त करूंगा; आप ही मेरे परमेश्वर हैं, मैं आपका गुणगान करूंगा.
२९
याहवेह का धन्यवाद करो, क्योंकि वे भले हैं, सनातन है उनकी करुणा.
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