स्तोत्र ११९:१-८
१
कैसे धन्य हैं वे, जिनका आचार-व्यवहार निर्दोष है, जिनका आचरण याहवेह की शिक्षाओं के अनुरूप है.
२
कैसे धन्य हैं वे, जो उनके अधिनियमों का पालन करते हैं तथा जो पूर्ण मन से उनके खोजी हैं.
३
वे याहवेह के मार्गों में चलते हैं, और उनसे कोई अन्याय नहीं होता.
४
आपने ये आदेश इसलिये दिए हैं, कि हम इनका पूरी तरह पालन करें.
५
मेरी कामना है कि आपके आदेशों का पालन करने में मेरा आचरण दृढ़ रहे!
६
मैं आपके आदेशों पर विचार करता रहूंगा, तब मुझे कभी लज्जित होना न पड़ेगा.
७
जब मैं आपकी धर्ममय व्यवस्था का मनन करूंगा, तब मैं निष्कपट हृदय से आपका स्तवन करूंगा.
८
मैं आपकी विधियों का पालन करूंगा; आप मेरा परित्याग कभी न कीजिए.
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