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स्तोत्र ११८:२२-२६

स्तोत्र ११८:२२-२६

२२
भवन निर्माताओं द्वारा अयोग्य घोषित शिला ही आधारशिला बन गई है;
२३
यह कार्य याहवेह का है, हमारी दृष्टि में अद्भुत.
२४
यह याहवेह द्वारा बनाया गया दिन है; आओ, हम आनंद में उल्‍लसित हों.
२५
याहवेह, हमारी रक्षा कीजिए! याहवेह, हमें समृद्धि दीजिए!
२६
स्तुत्य हैं वह, जो याहवेह के नाम में आ रहे हैं. हम याहवेह के आवास से आपका अभिनंदन करते हैं.
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