सूक्ति संग्रह ५:१२-१४
१२
और तब तुम यह विचार करके कहो, “क्यों मैं अनुशासन तोड़ता रहा! क्यों मैं ताड़ना से घृणा करता रहा!
१३
मैंने शिक्षकों के शिक्षा की अनसुनी की, मैंने शिक्षाओं पर ध्यान ही न दिया.
१४
आज मैं विनाश के कगार पर, सारी मण्डली के सामने, खड़ा हूं.”
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