Skip to content
सूक्ति संग्रह ३०:५-६

सूक्ति संग्रह ३०:५-६

“परमेश्वर का हर एक वचन प्रामाणिक एवं सत्य है; वही उनके लिए ढाल समान हैं जो उनमें आश्रय लेते हैं.
उनके वक्तव्य में कुछ भी न जोड़ा जाए ऐसा न हो कि तुम्हें उनकी फटकार सुननी पड़े और तुम झूठ प्रमाणित हो जाओ.
Settings

Reading Style

Typeface

Font Size 19px

Reading Width 45 chars

Options