Skip to content
सूक्ति संग्रह १६:६-७

सूक्ति संग्रह १६:६-७

६
निस्वार्थ प्रेम तथा खराई द्वारा अपराधों का प्रायश्चित किया जाता है; तथा याहवेह के प्रति श्रद्धा के द्वारा बुराई से मुड़ना संभव होता है.
७
जब किसी व्यक्ति का चालचलन याहवेह को भाता है, वह उसके शत्रुओं तक को उसके प्रति मित्र बना देते हैं.
Settings

Reading style

Typeface

Font size 19px

Reading width 75 chars

Options