मत्तियाह २५:२-८
२
उनमें से पांच तो मूर्ख थी तथा पांच समझदार.
३
मूर्ख युवतियों ने अपने साथ अपने दीप तो लिए किंतु तेल नहीं;
४
परंतु समझदार युवतियों ने अपने दीपों के साथ तेल के बर्तन भी रख लिए.
५
वर के पहुंचने में देर होने के कारण उन्हें नींद आने लगी और वे सो गई.
६
“आधी रात को यह धूमधाम का शब्द सुनाई दिया: ‘वर पहुंच रहा है! उससे भेंट के लिए बाहर आ जाओ.’
७
“सभी युवतियां उठीं और अपने-अपने दीप तैयार करने लगीं.
८
मूर्ख युवतियों ने समझदार युवतियों से विनती की, ‘अपने तेल में से कुछ हमें भी दे दो—हमारे दीप बुझे जा रहे हैं.’
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