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मत्तियाह १५:८-१०

मत्तियाह १५:८-१०

८
“ये लोग मात्र अपने होंठों से मेरा सम्मान करते हैं, किंतु उनके हृदय मुझसे बहुत दूर हैं.
९
व्यर्थ में वे मेरी वंदना करते हैं. उनकी शिक्षा सिर्फ मनुष्यों द्वारा बनाए हुए नियम हैं.”
१०
तब येशु ने भीड़ को अपने पास बुलाकर उनसे कहा, “सुनो और समझो:
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