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मत्तियाह १०:९-१३

मत्तियाह १०:९-१३

“यात्रा में अपने लिए सोना, चांदी तथा तांबे के सिक्कों को जमा न करना.
१०
यात्रा के लिए न थैला, न वस्त्रों के दूसरे जोड़े, न जूते और न ही लाठी साथ ले जाना क्योंकि भरण-पोषण हर एक मज़दूर का अधिकार है.
११
किसी भी गांव या नगर में प्रवेश करने पर योग्य व्यक्ति की खोज करना और वहां से विदा होने तक उसी के अतिथि होकर रहना.
१२
उस घर में प्रवेश करते समय उनके लिए मंगल कामना करना.
१३
यदि वह घर इस योग्य लगे तो उसके लिए शांति की आशीष देना; यदि वह इसके योग्य न लगे तो अपनी शांति की आशीष अपने पास लौट आने देना.
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