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मार्कास २:६-७

मार्कास २:६-७

वहां मौज़ूद कुछ शास्त्री अपने मन में यह विचार करने लगे,
“यह व्यक्ति ऐसा क्यों कह रहा है? यह तो परमेश्वर की निंदा कर रहा है! परमेश्वर के अतिरिक्त कौन पापों को क्षमा कर सकता है?”
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