विलापगीत ३:४८-५१
४८
मेरी प्रजा के इस विनाश के कारण मेरे नेत्रों के अश्रुप्रवाह नदी सदृश हो गए हैं.
४९
बिना किसी विश्रान्ति मेरा अश्रुपात होता रहेगा,
५०
जब तक स्वर्ग से याहवेह इस ओर दृष्टिपात न करेंगे.
५१
अपनी नगरी की समस्त पुत्रियों की नियति ने मेरे नेत्रों को पीड़ित कर रखा है.