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होशेआ ७:४-६

होशेआ ७:४-६

वे सबके सब व्यभिचारी हैं, एक जलते हुए चूल्हे के समान जिसकी आग को रोटी बनानेवाला तब तक तेज नहीं करता जब तक वह आटा गूंधकर पकाने के लिए तैयार नहीं कर लेता.
हमारे राजा के त्योहार के दिन राजकुमार दाखमधु पीकर उत्तेजित होते हैं, और वह हंसी उड़ानेवालों के साथ शामिल होता है.
उनके ह्रदय एक चूल्हे के समान हैं; वे उसके पास षड़्‍यंत्र रचकर जाते हैं. उनकी लालसा रात भर सुलगती रहती है; और सुबह यह आग की ज्वाला की तरह भभक उठती है.
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