Skip to content
उद्बोधक ४:२-३

उद्बोधक ४:२-३

सो मैंने जीवितों की तुलना में, मरे हुओं को, जिनकी मृत्यु हो चुकी है, अधिक सराहा कि वे अधिक खुश हैं.
मगर इन दोनों से बेहतर तो वह है जो कभी आया ही नहीं और जिसने इस धरती पर किए जा रहे कुकर्मों को देखा ही नहीं.
Settings

Reading style

Typeface

Font size 19px

Reading width 90 chars

Options