Skip to content
कोलोस्सॉय २:२०-२३

कोलोस्सॉय २:२०-२३

२०
जब तुम सांसारिक तत्वज्ञान के प्रति मसीह के साथ मर चुके हो तो अब तुम्हारी जीवनशैली ऐसी क्यों है, जो संसार के इन नियमों के अधीन है:
२१
“इसे मत छुओ! इसे मत चखो! इसे व्यवहार में मत लाओ!”?
२२
लगातार उपयोग के कारण इन वस्तुओं का नाश होना इनका स्वभाव है क्योंकि इनका आधार सिर्फ मनुष्य की आज्ञाएं तथा शिक्षाएं हैं.
२३
अपनी ही सुविधा के अनुसार गढ़ी गई आराधना विधि, विनम्रता के दिखावे तथा शरीर को कष्ट देने के भाव से ज़रूर दिखाई दे सकती है, किंतु शारीरिक वासनाओं के दमन के लिए ये सब हमेशा विफल सिद्ध होते हैं.
Settings

Reading style

Typeface

Font size 19px

Reading width 75 chars

Options