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2 कोरिंथ १:१७-१८

2 कोरिंथ १:१७-१८

१७
क्या मेरी यह योजना मेरी अस्थिर मानसिकता थी? या मेरे उद्देश्य मनुष्य के ज्ञान प्रेरित होते हैं कि मेरा बोलना एक ही समय में हां-हां भी होता है और ना-ना भी?
१८
जिस प्रकार निःसंदेह परमेश्वर विश्वासयोग्य हैं, उसी प्रकार हमारी बातों में भी “हां” का मतलब हां और “ना” का मतलब ना ही होता है.

बाइबल पाठ: Biblica® Open Hindi Contemporary Version™, © 1978, 2009, 2016, 2019 Biblica, Inc. · CC BY-SA 4.0“Biblica” is a trademark registered in the United States Patent and Trademark Office by Biblica, Inc., used with permission.