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1 तिमोथियॉस १:५-११

1 तिमोथियॉस १:५-११

५
हमारी आज्ञा का उद्देश्य है निर्मल हृदय से उत्पन्‍न प्रेम, शुद्ध अंतरात्मा तथा निष्कपट विश्वास.
६
कुछ हैं, जो रास्ते से भटक कर व्यर्थ के वाद-विवाद में फंस गए हैं.
७
वे व्यवस्था के शिक्षक बनने की अभिलाषा तो करते हैं परंतु वे जो कहते हैं और जिन विषयों का वे दृढ़ विश्वासपूर्वक दावा करते हैं, स्वयं ही उन्हें नहीं समझते.
८
हमें यह मालूम है कि व्यवस्था भली है—यदि इसका प्रयोग उचित रीति से किया जाए.
९
इस सच्चाई के प्रकाश में कि व्यवस्था का बनाया जाना धर्मियों के लिए नहीं परंतु अधर्मी, निरंकुश, दुराचारी, पापी, अपवित्र, ठग, माता-पिता के घात करनेवाले, हत्यारे,
१०
व्यभिचारी, समलैंगिक, अपहरण करनेवाले, झूठ बोलनेवाले, झूठे गवाह तथा शेष सब कुछ के लिए किया गया है, जो निर्मल उपदेश के विरोध में है.
११
वह धन्य परमेश्वर के गौरवान्वित ईश्वरीय सुसमाचार के अनुसार है, जो मुझे सौंपी गई है.

बाइबल पाठ: Biblica® Open Hindi Contemporary Version™, © 1978, 2009, 2016, 2019 Biblica, Inc. · CC BY-SA 4.0“Biblica” is a trademark registered in the United States Patent and Trademark Office by Biblica, Inc., used with permission.

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