पवित्रता और आज्ञाकारिता का आह्वान
1 पेतरॉस १:१३-२१
१३
इसलिये मानसिक रूप से कमर कस लो, सचेत रहो और अपनी आशा पूरी तरह उस अनुग्रह पर केंद्रित करो, जो मसीह येशु के प्रकट होने पर तुम्हें प्रदान किया जाएगा.
१४
परमेश्वर की आज्ञाकारी संतान होने के कारण उन अभिलाषाओं को तृप्त न करो, तुम पहले अज्ञानतावश जिनके अधीन थे.
१५
अपने पवित्र बुलानेवाले के समान तुम स्वयं अपने सारे स्वभाव में पवित्र हो जाओ;
१६
लिखा है: “पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूं.”
१७
यदि तुम उन्हें पिता कहते हो, जो मनुष्यों के कामों के आधार पर बिना पक्षपात के निर्णय करते हैं तो तुम पृथ्वी पर अपने रहने का समय उन्हीं के भय में बिताओ,
१८
इस अहसास के साथ कि पूर्वजों से चली आ रही तुम्हारे निकम्मे चालचलन से तुम्हारी छुटकारा नाशमान सोने के या चांदी के द्वारा नहीं,
१९
परंतु मसीह के बहुमूल्य लहू से हुआ है—निर्दोष और निष्कलंक मेमने के लहू से.
२०
यद्यपि वह सृष्टि के पहले से ही चुने हुए थे किंतु इन अंतिम दिनों में तुम्हारे लिए प्रकट हुए हैं.
२१
तुम, जो प्रभु द्वारा परमेश्वर में विश्वास करते हो, जिन्होंने उन्हें मरे हुओं में से जीवित कर गौरवान्वित किया, जिसके परिणामस्वरूप तुम्हारा विश्वास और आशा परमेश्वर में है.
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