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1 कोरिंथ १२:२५-२७

1 कोरिंथ १२:२५-२७

२५
कि शरीर में कोई फूट न हो परंतु हर एक अंग एक दूसरे का ध्यान रखे.
२६
यदि एक अंग को पीड़ा होती है, तो उसके साथ सभी अंग पीड़ित होते हैं. यदि एक अंग को सम्मानित किया जाता है तो उसके साथ सभी अंग उसके आनंद में सहभागी होते हैं.
२७
तुम मसीह के शरीर हो और तुममें से हर एक इस शरीर का अंग है.
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