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सर्वश्रेष्ठ गीत ८:६-७

सर्वश्रेष्ठ गीत ८:६-७

अपने हृदय पर मुझे एक मोहर जैसे लगा लो, हाथ पर मोहर के समान; प्रेम उतना ही सामर्थ्यी है, जितनी मृत्यु, ईर्ष्या उतनी ही निर्दयी, जितनी मृत्यु. उसकी ज्वाला आग की ज्वाला है, जो वास्तव में याहवेह ही की ज्वाला है.
पानी की बाढ़ भी प्रेम को बुझाने में असमर्थ होती है; नदी में आई बाढ़ इसे डुबोने में असफल रहती है. यदि कोई व्यक्ति प्रेम के लिए अपनी सारी संपत्ति भी देना चाहे, यह संपत्ति तुच्छ ही होगी.
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