स्तोत्र ९७:२-४
२
प्रभु के आस-पास मेघ और गहन अंधकार छाया हुआ है; उनके सिंहासन का आधार धार्मिकता और सच्चाई है.
३
जब वह आगे बढ़ते हैं, अग्नि उनके आगे-आगे बढ़ते हुए उनके समस्त शत्रुओं को भस्म करती जाती है.
४
उनकी बिजलियां समस्त विश्व को प्रकाशित कर देती हैं; यह देख पृथ्वी कांप उठती है.