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स्तोत्र ९७:१०-१२

प्रेम और पवित्रता का उपदेश

स्तोत्र ९७:१०-१२
१०
यह उपयुक्त है कि वे सभी, जिन्हें याहवेह से प्रेम है, बुराई से घृणा करें, प्रभु अपने भक्तों के प्राणों की रक्षा करते हैं, वह उन्हें दुष्टों की युक्ति से छुड़ाते हैं.
११
धर्मियों के जीवन प्रकाशित किए जाते हैं तथा निष्ठों के हृदय आनन्दविभोर.
१२
समस्त धर्मियो, याहवेह में प्रफुल्लित हो और उनके पवित्र नाम का स्तवन करो.
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