Skip to content
स्तोत्र ९७:१-३

स्तोत्र ९७:१-३

१
यह याहवेह का शासन है, पृथ्वी उल्‍लसित हो; दूर के तटवर्ती क्षेत्र आनंद मनाएं.
२
प्रभु के आस-पास मेघ और गहन अंधकार छाया हुआ है; उनके सिंहासन का आधार धार्मिकता और सच्चाई है.
३
जब वह आगे बढ़ते हैं, अग्नि उनके आगे-आगे बढ़ते हुए उनके समस्त शत्रुओं को भस्म करती जाती है.
Settings

Reading style

Typeface

Font size 19px

Reading width 75 chars

Options