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स्तोत्र ९२:७-८

स्तोत्र ९२:७-८

यद्यपि दुष्ट घास के समान अंकुरित तो होते हैं और समस्त दुष्ट उन्‍नति भी करते हैं, किंतु उनकी नियति अनंत विनाश ही है.
किंतु, याहवेह, आप सदा-सर्वदा सर्वोच्च ही हैं.
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