Skip to content
स्तोत्र ९२:१०-११

व्यक्तिगत न्याय की आश्वस्ति

स्तोत्र ९२:१०-११
१०
किंतु मेरी शक्ति को आपने वन्य सांड़ समान ऊंचा कर दिया है; आपने मुझ पर नया नया तेल उंडेल दिया है.
११
स्वयं मैंने अपनी ही आंखों से अपने शत्रुओं का पतन देखा है; स्वयं मैंने अपने कानों से अपने दुष्ट शत्रुओं के कोलाहल को सुना है.
Settings

Reading style

Typeface

Font size 19px

Reading width 90 chars

Options