Skip to content
स्तोत्र ७३:२५-२६

स्तोत्र ७३:२५-२६

२५
स्वर्ग में आपके अतिरिक्त मेरा कौन है? आपकी उपस्थिति में मुझे पृथ्वी की किसी भी वस्तु की कामना नहीं रह जाती.
२६
यह संभव है कि मेरी देह मेरा साथ न दे और मेरा हृदय क्षीण हो जाए, किंतु मेरा बल स्वयं परमेश्वर हैं; वही मेरी निधि हैं.
Settings

Reading style

Typeface

Font size 19px

Reading width 90 chars

Options