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स्तोत्र ३:३-४

परमेश्वर पर मेरी ढाल के रूप में भरोसा

स्तोत्र ३:३-४
३
किंतु, याहवेह, आप सदैव ही जोखिम में मेरी ढाल हैं, आप ही हैं मेरी महिमा, आप मेरा मस्तक ऊंचा करते हैं.
४
याहवेह! मैंने उच्च स्वर में आपको पुकारा है, और आपने अपने पवित्र पर्वत से मुझे उत्तर दिया.
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