Skip to content
स्तोत्र २३:५-६

उदार मेज़बान और अनन्त निवास

स्तोत्र २३:५-६
आप मेरे शत्रुओं के सामने मेरे लिए उत्कृष्ट भोजन परोसते हैं. आप तेल से मेरे सिर को मला करते हैं; मेरा प्याला उमड़ रहा है.
निश्चयतः कुशल मंगल और करुणा-प्रेम आजीवन मेरे साथ साथ बने रहेंगे, और मैं सदा-सर्वदा याहवेह के आवास में, निवास करता रहूंगा.
Settings

Reading style

Typeface

Font size 19px

Reading width 90 chars

Options