Skip to content
स्तोत्र १९:२-३

स्तोत्र १९:२-३

२
हर एक दिन आगामी दिन से इस विषय में वार्तालाप करता है; हर एक रात्रि आगामी रात्रि को ज्ञान की शक्ति प्रगट करती है.
३
इस प्रक्रिया में न तो कोई बोली है, न ही कोई शब्द; यहां तक कि इसमें कोई आवाज़ भी नहीं है.
Settings

Reading style

Typeface

Font size 19px

Reading width 75 chars

Options