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स्तोत्र १५०:१-२

परमेश्वर की स्तुति कहाँ और क्यों करें

स्तोत्र १५०:१-२
याहवेह का स्तवन हो. परमेश्वर का उनके मंदिर में स्तवन हो; अत्यंत विशाल आकाश में उनका स्तवन हो.
उनके अद्भुत कार्यों के लिए उनका स्तवन हो; उनके सर्वोत्कृष्ट महानता के योग्य उनका स्तवन हो.
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