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स्तोत्र १४६:१-२

स्तुति का आह्वान और जीवनभर की प्रतिबद्धता

स्तोत्र १४६:१-२
याहवेह का स्तवन हो. मेरे प्राण, याहवेह का स्तवन करो.
जीवन भर मैं याहवेह का स्तवन करूंगा; जब तक मेरा अस्तित्व है, मैं अपने परमेश्वर का स्तुति गान करता रहूंगा.
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