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स्तोत्र १२६:४-६

पूर्ण बहाली और फसल के लिए प्रार्थना

स्तोत्र १२६:४-६
४
याहवेह, नेगेव की नदी समान, हमारी समृद्धि लौटा लाइए.
५
जो अश्रु बहाते हुए रोपण करते हैं, वे हर्ष गीत गाते हुए उपज एकत्र करेंगे.
६
वह, जो रोते हुए बीजारोपण के लिए बाहर निकलता है, अपने साथ पूले लेकर हर्ष गीत गाता हुआ लौटेगा.
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