Skip to content
स्तोत्र १२४:५-८

स्तोत्र १२४:५-८

उग्र जल प्रवाह हमें दूर बहा ले गया होता.
स्तवन हो याहवेह का, जिन्होंने हमें उनके दांतों से फाड़े जाने से बचा लिया है.
हम उस पक्षी के समान हैं, जो बहेलिए के जाल से बच निकला है; वह जाल टूट गया, और हम बच निकले.
हमारी सहायता याहवेह के नाम से है, जो स्वर्ग और पृथ्वी के कर्ता हैं.
Settings

Reading Style

Typeface

Font Size 19px

Options