स्तोत्र १२४:२-५
२
यदि हमारे पक्ष में याहवेह न होते जब मनुष्यों ने हम पर आक्रमण किया था,
३
जब उनका क्रोध हम पर भड़क उठा था वे हमें जीवित ही निगल गए होते;
४
बाढ़ ने हमें जलमग्न कर दिया होता, जल प्रवाह हमें बहा ले गया होता,
५
उग्र जल प्रवाह हमें दूर बहा ले गया होता.