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स्तोत्र ११६:३-४

संकट और व्याकुल प्रार्थना का स्मरण

स्तोत्र ११६:३-४
३
मृत्यु के डोर मुझे कसे जा रहे थे, अधोलोक की वेदना से मैं भयभीत हो चुका था; भय और संकट में मैं पूर्णतः डूब चुका था.
४
इस स्थिति में मैंने याहवेह के नाम को पुकारा: “याहवेह, मेरा अनुरोध है, मुझे बचाइए!”
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