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स्तोत्र ११५:१-३

परमेश्वर की महिमा के लिए गुहार

स्तोत्र ११५:१-३
१
हमारी नहीं, याहवेह, हमारी नहीं, परंतु आपकी ही महिमा हो, आपके करुणा-प्रेम और आपकी सच्चाई के निमित्त.
२
अन्य जनता यह क्यों कह रहे हैं, “कहां है उनका परमेश्वर?”
३
स्वर्ग में हैं हमारे परमेश्वर और वह वही सब करते हैं; जिसमें उनकी चाहत है.
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