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स्तोत्र १०७:४-५

स्तोत्र १०७:४-५

कुछ निर्जन वन में भटक रहे थे, जिन्हें नगर की ओर जाता हुआ कोई मार्ग न मिल सका.
वे भूखे और प्यासे थे, वे दुर्बल होते जा रहे थे.
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