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स्तोत्र १०७:२८-३०

स्तोत्र १०७:२८-३०

२८
अपनी विपत्ति की स्थिति में उन्होंने याहवेह को पुकारा, याहवेह ने उन्हें उनकी दुर्दशा से छुड़ा लिया.
२९
याहवेह ने बवंडर को शांत किया और समुद्र की लहरें स्तब्ध हो गईं.
३०
लहरों के शांत होने पर उनमें हर्ष की लहर दौड़ गई, याहवेह ने उन्हें उनके मनचाहे बंदरगाह तक पहुंचा दिया.
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