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स्तोत्र १०२:२१-२३

स्तोत्र १०२:२१-२३

२१
कि मनुष्य ज़ियोन में याहवेह की महिमा की घोषणा कर सकें तथा येरूशलेम में उनका स्तवन,
२२
जब लोग तथा राज्य याहवेह की वंदना के लिए एकत्र होंगे.
२३
मेरी जीवन यात्रा पूर्ण भी न हुई थी, कि उन्होंने मेरा बल शून्य कर दिया; उन्होंने मेरी आयु घटा दी.
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