Skip to content
सूक्ति संग्रह ८:३०-३१

सूक्ति संग्रह ८:३०-३१

३०
उस समय मैं उनके साथ साथ कार्यरत था. एक प्रधान कारीगर के समान प्रतिदिन मैं ही उनके हर्ष का कारण था, सदैव मैं उनके समक्ष आनंदित होता रहता था,
३१
उनके द्वारा बसाए संसार में तथा इसके मनुष्यों में मेरा आनंद था.
Settings

Reading Style

Typeface

Font Size 19px

Options