Skip to content
सूक्ति संग्रह ६:३४-३५

सूक्ति संग्रह ६:३४-३५

३४
ईर्ष्या किसी भी व्यक्ति को क्रोध में भड़काती है, प्रतिशोध की स्थिति में उसकी सुरक्षा संभव नहीं.
३५
उसे कोई भी क्षतिपूर्ति स्वीकार्य नहीं होती; कितने भी उपहार उसे लुभा न सकेंगे.
Settings

Reading style

Typeface

Font size 19px

Reading width 90 chars

Options