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सूक्ति संग्रह ६:३३-३५

सूक्ति संग्रह ६:३३-३५

३३
घाव और अपमान उसके अंश होंगे, उसकी नामधराई मिटाई न जा सकेगी.
३४
ईर्ष्या किसी भी व्यक्ति को क्रोध में भड़काती है, प्रतिशोध की स्थिति में उसकी सुरक्षा संभव नहीं.
३५
उसे कोई भी क्षतिपूर्ति स्वीकार्य नहीं होती; कितने भी उपहार उसे लुभा न सकेंगे.
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