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सूक्ति संग्रह ६:३२-३३

सूक्ति संग्रह ६:३२-३३

३२
वह, जो व्यभिचार में लिप्‍त हो जाता है, निरा मूर्ख है; वह, जो यह सब कर रहा है, स्वयं का विनाश कर रहा है.
३३
घाव और अपमान उसके अंश होंगे, उसकी नामधराई मिटाई न जा सकेगी.
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